Friday, 25 January 2019

यूएन की रिपोर्ट 2019-20 मे भारत के विकास का स्तर कैसा रहेगा

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की वैश्विक आर्थिक स्थिति एवं संभावनाएं (डब्ल्यूईएसपी) 2019 रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2019 और 2020 में दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि वृद्धि को मजबूत निजी उपभोग और अधिक विस्तार वाले वित्तीय रुख तथा पिछले सुधारों के लाभ से सहारा मिल रहा है. इसमें कहा गया है कि मध्यम अवधि की वृद्धि दर के लिए निजी निवेश में सतत सुधार महत्वपूर्ण है. भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर: रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2018-19 में 7.4 प्रतिशत तथा अगले वित्त वर्ष 2019-20 में 7.6 प्रतिशत रहेगी. वर्ष 2020-21 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहेगी. निजी निवेश में लगातार सुधार: रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यम अवधि की वृद्धि दर के लिए निजी निवेश में लगातार सुधार जरूरी है. वैश्विक अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2019 और 2020 में इसकी वृद्धि दर तीन प्रतिशत के करीब रहेगी. चीन की रफ्तार कम होगी: यूएन की रिपोर्ट में चीन का जिक्र करते हुए कहा गया है कि यहां वर्ष 2018 में विकास दर 6.6 फीसदी और वर्ष 2019 में और अधिक गिरावट के साथ 6.3 फीसदी रहने का अनुमान है. इसके लिए ट्रेड वॉर को भी जिम्मेदार बताया गया है. संयुक्त राष्ट्र के बारे में: संयुक्त राष्ट्र (यूएन) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है. इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कानून को सुविधाजनक बनाने के सहयोग, अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, मानव अधिकार और विश्व शांति के लिए कार्यरत है. संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र अधिकारपत्र पर 50 देशों के हस्ताक्षर होने के साथ हुई. वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र में 193 देश है, विश्व के लगभग सारे अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त देश हैं. इस संस्था की संरचन में आम सभा, सुरक्षा परिषद, आर्थिक व सामाजिक परिषद, सचिवालय और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय सम्मिलित है.

यस बैंक के नये एमडी

यस बैंक ने 24 जनवरी 2019 को रवनीत सिंह गिल को बैंक का नया मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चुन लिया है. वे 01 मार्च 2019 या उससे पहले पदभार संभाल सकते हैं. नियामकीय फाइलिंग में बैंक ने बताया कि उसे रवनीत सिंह गिल के नाम पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की ओर से मंजूरी मिल गई है. वे यस बैंक में राणा कपूर का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक ने सितंबर 2018 में राणा कपूर को जनवरी 2019 अंत तक पद छोड़ने का निर्देश दिया था. राणा कपूर अपनी निकट संबंधी बिंदू कपूर के साथ देश में निजी क्षेत्र के पांचवें बड़े बैंक के प्रवर्तकों में शामिल हैं. अनुरोध खारिज: सितंबर 2018 में आरबीआई ने राणा कपूर का कार्यकाल तीन साल बढ़ाने के बैंक के अनुरोध को खारिज कर दिया था और कहा था कि वे 31 जनवरी 2019 तक पद पर बने रह सकते हैं. रवनीत सिंह गिल के बारे में: • रवनीत सिंह गिल डॉयचे बैंक के साथ वर्ष 1991 से जुड़े हैं और वर्ष 2012 से वह भारत में बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं. • रवनीत गिल सिंह 6 साल से डॉयचे बैंक ऑफ इंडिया के प्रमुख हैं और उन्हें बैंकिंग क्षेत्र का 30 साल से अधिक लंबा अनुभव है. • गिल को कैपिटल मार्केट, ट्रेजरी, फाइनेंस, फॉरेन एक्सचेंज, रिस्क मैनेजमेंट और प्राइवेट बैंकिंग का अनुभव है.

Wednesday, 23 January 2019

जीएसटीएटी GSTAT

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 23 जनवरी 2019 को वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय अधिकरण की राष्ट्रीय पीठ (जीएसटीएटी) के गठन को मंजूरी दे दी है. अपीलीय अधिकरण की राष्ट्रीय पीठ नई दिल्ली में स्थित होगी. जीएसटीएटी की अध्यक्षता इसके अध्यक्ष करेंगे एवं इसमें एक तकनीकी सदस्य (केन्द्र) और एक तकनीकी सदस्य (राज्य) शामिल होंगे. जीएसटीएटी की राष्ट्रीय पीठ के गठन पर एकमुश्त व्यय 92.50 लाख रुपये का होगा, जबकि आवर्ती व्यय सालाना 6.86 करोड़ रुपये होगा. उल्लेखनीय है कि अभी जीएसटी के तहत राज्य के भीतर होने वाले विवाद के निपटान के लिए व्यवस्था मौजूद है. लेकिन अब, दो या अधिक राज्यों के बीच होने वाले विवादों के समाधान के उद्देश्य से जीएसटीएटी की राष्ट्रीय पीठ बनाने को मंजूरी दी गयी है. जीएसटी परिषद ने इसके गठन की सिफारिश की थी. जीएसटी अपीलीय अधिकरण का ब्यौरा • वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय अधिकरण, जीएसटी कानूनों में दूसरा अपील का मंच है और केन्द्र एवं राज्यों के बीच विवाद समाधान का प्रथम समान मंच है. • केन्द्र और राज्य, वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के अंतर्गत अपीलीय प्राधिकरणों द्वारा जारी प्रथम अपीलों में दिए गए आदशों के विरुद्ध अपील, जीएसटी अपीलीय अधिकरण के समक्ष दाखिल होती है जो कि केन्द्र तथा राज्य जीएसटी अधिनियमों के अंतर्गत एक होता है. • समान मंच होने के कारण जीएसटी अपीलीय अधिकरण सुनिश्चित करेगा कि जीएसटी के अंतर्गत उत्पन्न हो रहे विवादों का निपटान उचित समयावधि में किए जाए. • जीएसटी संबंधित सभी विवादों का एक स्थान पर निपटान होने से विवादों के समाधान में एकरूपता होगी और इस प्रकार समूचे देश में जीएसटी को समान रूप से कार्यान्वित किया जाएगा. cabinet approval संवैधानिक प्रावधान • वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के अध्याय XVIII में जीएसटी प्रशासन के अंतर्गत विवाद समाधान हेतु अपीलीय और समीक्षा तंत्र की व्यवस्था की गई है. • केन्द्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 109 केन्द्रीय सरकार को इस बात के लिए शक्ति प्रदान करती है कि वह परिषद की सिफारिश पर अधिसूचना द्वारा सिफारिश में विनिर्दिष्ट तारीख से प्रभावी बनाते हुए वस्तु एवं सेवा कर अपील के रूप में पारित किए गए आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई करेगा.

सिक्का अधिनियम2011

भारतीय रिज़र्व बैंक; भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुसार मुद्रा नोट्स प्रिंट करता है, जबकि भारत में सिक्के, सिक्का अधिनियम, 2011 के अनुसार बनाये जाते हैं. सिक्का अधिनियम, 2011 जम्मू-कश्मीर सहित पूरे भारत में लागू है. भारतीय रिजर्व बैंक भारत का सर्वोच्च मौद्रिक प्राधिकरण है. यह 2 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक के नोटों को प्रिंट करने के लिए अधिकृत है. एक रुपये का नोट आरबीआई के बजाय वित्त मंत्रालय द्वारा मुद्रित किया जाता है. लेकिन मुद्रा और सिक्के का अर्थव्यवस्था में प्रचलन (circulation) केवल आरबीआई द्वारा किया जाता है. इस लेख के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया है कि भारत में सिक्कों के इस्तेमाल को लेकर क्या क्या नियम बनाये गए हैं. इस लेख में हम सिक्का अधिनियम, 2011 के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान प्रकाशित कर रहे हैं; 1. यह अधिनियम जम्मू-कश्मीर राज्य सहित पूरे भारत में लागू है. 2. "सिक्का" का अर्थ किसी भी ऐसी “धातु” से बने सिक्कों से है जिससे सिक्के बनाने की अनुमति केंद्र सरकार या उसके द्वारा अधिकृत किसी संगठन द्वारा दी गयी है. 3. धातु "का अर्थ है किसी भी धातु, मिश्र धातु सोना, बेस धातु, चांदी या किसी भी अन्य सामग्री जिसे सिक्का बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा मान्यता दी गयी है. नोट पर क्यों लिखा होता है कि “मैं धारक को 100 रुपये अदा करने का वचन देता हूँ.” 4. यदि कोई व्यक्ति किसी भी सिक्के (यदि सिक्का चलन में है) को लेने से मना करता है तो उसके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जा सकती है. उसके खिलाफ भारतीय मुद्रा अधिनियम व आइपीसी के तहत कार्रवाई होगी. मामले की शिकायत रिजर्व बैंक में भी की जा सकती है. FAKE original 10 rupee coin (कुछ दुकानदार 10 रु. का असली सिक्का लेने से मना कर देते हैं, इसलिए कई लोगों के खिलाफ कार्यवाही भी की गयी है) 5. केंद्र सरकार सिक्कों को बनाने के लिए देश की भीतर किसी संगठन या किसी भी विदेशी देश की सरकार की सहायता ले सकती है. यहाँ तक कि सिक्कों को विदेश में बनवाकर भारत में आयात भी किया जा सकता है. 6 . सिक्का अधिनियम, 2011 की धारा 4 के प्रावधानों के तहत सिक्के का भार तय किया जाता है लेकिन किसी भी दशा में सिक्के का अंकित मूल्य, सिक्के में लगी धातु के मूल्य से कम नहीं होना चाहिए. क्योंकि यदि ऐसा हो जाता है तो लोग सिक्के को पिघलाकर उसकी धातु को बाजार में बेचकर ज्यादा लाभ कमा लेंगे. यदि कारण है कि सरकार सिक्के के आकार को छोटा करती जा रही है ताकि उनमें लगी धातु का मूल्य सिक्के की फेस वैल्यू की तुलना में कम रहे. 7. सिक्का अधिनियम, 2011 की धारा 6 में प्रदत्त अधिकार के अंतर्गत जारी सिक्के भुगतान के लिए वैध मुद्रा होंगे बशर्ते कि सिक्के को विरूपित न किया गया हो और उनका वजन निर्धारित वजन से कम ना हो. 8. सिक्कों से कितनी बड़ी राशि का भुगतान किया जा सकता है? सिक्का अधिनियम, 2011 की धारा 4 के प्रावधानों के तहत; (a). यदि कोई सिक्का एक रुपये से ऊपर का है तो इस प्रकार से सिक्कों से केवल 1000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है, इससे ज्यादा का भुगतान सिक्कों में करना कानूनी अपराध है. (b). यदि कोई व्यक्ति 50 पैसे के सिक्कों में कोई भुगतान करना चाहता है तो वह केवल 10 रुपये तक का भुगतान का सकता है. (c). 50 पैसे के कम के सिक्कों में केवल एक रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है. हालाँकि 50 पैसे से कम मूल्य के सिक्के अब वैध नही रहे हैं. 1 पैसे, 2 पैसे, 3 पैसे, 5 पैसे, 10 पैसे, 20 पैसे और 25 पैसे मूल्यवर्ग के सिक्के 30 जून 2011 से संचलन से वापिस लिये गये हैं, अतः वे वैध मुद्रा नहीं रहे. 9. सिक्का अधिनियम, 2011 की धारा 5 के खंड (ए) के प्रावधानों के तहत, यदि कोई व्यक्ति किसी सिक्के को काटता या तोड़ता है तो उसे उसी सिक्के के बराबर मूल्य का जुर्माना भरना होगा. DISTORTED COIN (भारतीय सिक्के के साथ ऐसा सलूक करना अपराध है) 10. सिक्का अधिनियम- 2011 की धारा 9 में यह प्रावधान है कि यदि सरकार द्वारा अधिकृत किसी भी व्यक्ति भी व्यक्ति को लगता है कि उसे किसी व्यक्ति ने सिक्का नकली दिया है तो वह व्यक्ति उस सिक्के को नष्ट करने का हक़ रखता है और इसमें नुकसान सिक्का धारक का होगा. 11. कोई भी व्यक्ति सिक्का के रूप में किसी भी धातु के टुकड़े (चाहे वह धातु मुद्रित हो या गैर मुद्रित) का उपयोग नहीं करेगा. 12. कोई भी व्यक्ति किसी सिक्का को पिघला या नष्ट नहीं करेगा. 13. कोई भी व्यक्ति विनिमय के माध्यम (medium of exchange) के अलावा सिक्का का कोई और उपयोग नहीं करेगा. 14. किसी भी व्यक्ति के पास पिघला हुआ या ठोस अवस्था में सिक्का नहीं होगा. 15. किसी भी व्यक्ति को सिक्के को विरूपित रूप या खंडित रूप में रखें का हक नहीं है. 16. किसी भी व्यक्ति को अपनी जरुरत से ज्यादा मात्रा में सिक्कों को रखने की अनुमति नहीं है. इसके साथ ही कोई भी व्यक्ति सिक्कों में उनकी फेस वैल्यू से ज्यादा कीमत में बेच भी नहीं सकता है. 17. सिक्कों को पिघलाकर किसी अन्य वस्तु को बनाने के लिए भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार भारत के सिक्के बांग्लादेश में तस्करी के जरिये ले जाये जाते हैं और वहां पर इनसे ब्लेड और अन्य नकली जेबरात इत्यादि बनाये जाते हैं. indian coins smuggled 18. सिक्का अधिनियम, 2011 के कार्यान्वयन के बाद; नीचे दिए गए कानूनों को सरकार द्वारा निरस्त कर दिया गया है; (a) द मेटल टोकन्स एक्ट, 1889 (b) सिक्का अधिनियम, 1906 (c) कांस्य सिक्का (कानूनी निविदा) अधिनियम, 1918 (d) मुद्रा अध्यादेश, 1940 (e) छोटे सिक्के (अपराध) अधिनियम, 1971 उपर्युक्त 18 बिन्दुओं को पढ़ने के बाद यह बात स्पष्ट हो गयी है कि भारत में सिक्कों से सम्बंधित बहुत से नियम सरकार ने बनाये थे लेकिन जानकारी के आभाव में लोग जाने और अनजाने इनका पालन नहीं करते थे. उम्मीद है कि इस लेख को पढ़ने के बाद आप सिक्का अधिनियम, 2011 के प्रावधानों को ठीक से समझ गए होंगे.

डिजिटल पेमेंट समिति

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 08 जनवरी 2019 को डिजिटल पेमेंट को बेहतर तरीके से देश में लागू करने और सुविधा को बढ़ाने के लिए नई समिति बनाई है. इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को इस समिति का चेयरमैन नियुक्त किया गया है. नीलेकणि की अध्यक्षता में समिति को 90 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है. विदित हो कि देश में आधार को लागू कराने का श्रेय नंदन नीलेकणि को ही जाता है. वे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के भी अध्यक्ष रह चुके हैं. डिजिटल पेमेंट समिति नंदन नीलेकणि के अलावा समिति में सीआईआईई के चीफ इनोवेशन ऑफिसर संजय जैन, विजया बैंक के पूर्व सीईओ किशोर सांसी, मिनिस्ट्री ऑफ इन्फोरमेशन के मुख्य सचिव अरुणा शर्मा को शामिल किया गया है. पांच सदस्यों वाली इस समिति का काम देश में डिजिटल पेमेंट को तेजी से आगे बढ़ाना है. रेग्युलेटर को क्या कदम उठाने चाहिए. उपभोक्ताओं के पैसों को सुरक्षित रखने के लिए क्या करना होगा. इंटरनेट बैंकिंग को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाने होंगे यह समिति इन्हीं विषयों पर काम करेगी. नंदन नीलेकणि के बारे में जानकारी • नंदन नीलेकणि को आधार को भारत में लागू करने पर विशिष्ट पहचान मिली है. • नीलेकणि ने देश के हर नागरिक को एक विशिष्ठ पहचान संख्या या यूनिक आइडेंटीफिकेशन नंबर प्रदान करने की भारत सरकार के योजना को सफलतापूर्वक लागू किया है. • भारत सरकार ने उन्हें 2006 में विज्ञान और अभियांत्रिकी के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया है. • उन्हें टोरंटो यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट ऑफ लॉ की उपाधि मिली है. • प्रसिद्ध पत्रिका टाइम मैगजीन ने नीलेकणि को दुनिया के 100 ऐसे लोगों में शामिल किया, जो सबसे ज्यादा प्रेरणादायक थे. • वर्ष 2006 के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में नीलेकणि सबसे युवा उद्यमी थे, जो दुनिया 20 टॉप ग्लोबल लीडर्स में शामिल हुए थे. • वर्ष 1982 में इंफोसिस की संस्थापना करने वाले नीलेकणि मार्च 2002 से जून 2007 तक कंपनी के मुख्य कार्यकारी और प्रबंध निदेशक के तौर पर काम करते रहे और फिर उन्हें कंपनी बोर्ड का सह अध्यक्ष नियुक्त किया गया.

Tuesday, 22 January 2019

CERC,JERC..

इंदु शेखर झा को 21 जनवरी 2019 को केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) का सदस्य नियुक्त किया गया. केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) आर के सिंह ने इंदु शेखर झा को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इंदु शेखर झा को 04 जनवरी 2019 के आदेश द्वारा केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (सीईआरसी) का सदस्य नियुक्त किया गया. इससे पहले, वे 2015 से पॉवरग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पीजीसीआईएल) के अध्‍यक्ष व प्रबंध निदेशक का पद संभाल रहे थे. विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) के सदस्य के रूप में नियुक्त: इसके अलावा, लालछारलियाना पचुआउ को मिजोरम की ओर से मणिपुर और मिजोरम के लिए संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया. लालछारलियाना पचुआउ को पांच साल की अवधि या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, के लिए नियुक्त किया गया है, जो मणिपुर और मिजोरम की राज्य सरकारों द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के प्रावधानों के अनुरूप है. उन्होंने जुलाई 2013 से मणिपुर और मिजोरम के लिए जेईआरसी में प्रमुख (अभियांत्रिकी) के रूप में काम किया है. सीईआरसी के बारे में: • केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) की स्थापना भारत सरकार द्वारा विद्युत नियामक आयोग (ईआरसी) अधिनियम, 1998 के प्रावधानों के तहत की गई थी. • सीईआरसी विद्युत अधिनियम, 2003 के प्रयोजन के लिए एक केंद्रीय आयोग है, जिसने ईआरसी अधिनियम, 1998 को निरस्त कर दिया है. • आयोग में एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य होते हैं जिनमें अध्यक्ष, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण शामिल हैं जो आयोग के पदेन सदस्य हैं. • सीईआरसी के प्रमुख कार्य में केंद्र सरकार की स्वामित्व या नियंत्रित सृजनकारी कंपनियों के प्रशुल्‍क को विनियमित करना, एक से अधिक राज्यों में बिजली उत्पादन और बिक्री के लिए एक समग्र योजना बनाने वाली अन्य उत्पादक कंपनियों के प्रशुल्‍क को विनियमित करना तथा बिजली के अंतर-राज्य पारेषण को विनियमित करना और बिजली के इस तरह के पारेषण के लिए प्रशुल्‍क का निर्धारण करना इत्‍यादि हैं. जेईआरसी के बारे में: • केंद्र सरकार ने मणिपुर और मिजोरम के लिए विद्युत अधिनियम, 2003 के प्रावधानों और उनके लिए एक संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) का गठन किया था. • मणिपुर और मिजोरम की राज्य सरकारों द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के अनुसरण में संयुक्त विद्युत नियामक आयोग (जेईआरसी) का गठन किया. • यह एक दो सदस्यीय आयोग है, जिसमें से प्रत्येक सदस्य संबंधित राज्य का प्रतिनिधित्व करता है. • केंद्र सरकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत एवं समझौता ज्ञापन के अनुसरण में मणिपुर और मिजोरम की तरफ से आयोग के सदस्यों को नियुक्त करती है. • आयोग के प्रमुख कार्य में बिजली के उत्पादन, वितरण लाइसेंसधारियों की बिजली खरीद को विनियमित करना, वितरण लाइसेंसधारियों और बिजली व्यापारियों को लाइसेंस जारी करना, ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों से बिजली के उत्पादन और सह-उत्पादन को बढ़ावा देना तथा लाइसेंसधारियों और उत्‍पादन करने वाली कंपनियों के बीच विवादों पर फैसला करना इत्‍यादि हैं.

GST council..

जीएसटी काउंसिल ने 10 जनवरी 2019 को कंपोजिशन स्कीम को लेकर बड़ा फैसला किया है. ये काउंसिल की 32वी बैठक थी. जीएसटी काउंसिल ने कंपोजिशन स्कीम और जीएसटी की सीमा में कई बदलाव किए हैं. जीएसटी काउंसिल की बैठक में सभी राज्यों के वित्तमंत्री शामिल होते हैं. ये बैठक 10 जनवरी 2019 को दिल्ली में वित्तमंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में हुई. जीएसटी से जुड़े हुए सभी मामलों पर फैसला जीएसटी काउंसिल ही लेती है. पिछली बैठक में 26 चीजों पर टैक्स की दर को कम किया गया था. जीएसटी काउंसिल द्वारा किए गए बदलाव: • जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी के दायरे को बढ़ा दिया है. अभी 20 लाख रुपए तक टर्नओवर करने वाले कारोबारी जीएसटी के दायरे में आते हैं. अब 40 लाख टर्नओवर वाले जीएसटी के दायरे में आएंगे. • जीएसटी के दायरे में छोटे राज्यों में जो लिमिट 10 लाख थी वो लिमिट 20 लाख रुपए कर दी गई है. इस कारण कई छोटे कारोबारी जीएसटी के दायरे से बाहर हो जाएंगे. इन छोटे कारोबारियों को जीएसटी रजिस्ट्रेशन का झमेला नहीं रहेगा. क्या है जीएसटी कंपोजिशन स्कीम: जीएसटी मे सप्लाई और टैक्स रिटर्न्स का रिकॉर्ड को लगातार बनाए रखना किसी भी व्यापारी के लिए एक जटिल काम है. जीएसटी में आने वाली इन्हीं समस्यों को सरल बनाने के लिए सरकार द्वारा कम्पोजीशन स्कीम लागू की गई हैं. सरकार ने छोटे कारोबारियों को राहत देने के लिए कंपोजिशन स्कीम शुरू की है. • जीएसटी काउंसिल की बैठक में कंपोजिशन स्कीम की सीमा को 1.5 करोड़ रुपए कर दिया गया है. अभी तक ये सीमा 1 करोड़ रुपए थी. ये नई सीमा 1 अप्रैल 2019 से लागू होगी. • इसके अतिरिक्त जीएसटी काउंसिल ने एसएमई को वार्षिक रिटर्न फाइल करने की छूट दे दी है. इसका अर्थ है 1 अप्रैल 2019 से इन कारोबारियों को साल में 1 ही रिटर्न भरना होगा. हालांकि इन छोटे कारोबारियों को हर तिमाही टैक्स भरना होगा. पहले इनको हर तिमाही में रिटर्न भी भरना होता था. • जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में 50 लाख तक का कारोबार करने वाली सर्विस सेक्टर यूनिट को भी कंपोजिशन स्कीम के दायरे में लाया गया है. इन पर 6 फीसदी की दर से टैक्स लगेगा. • जीएसटी काउंसिल ने केरल को 2 साल के लिए 1 फीसदी आपदा सेस लगाने की मंजूरी भी दे दी है. जीएसटी काउंसिल की बैठक में अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन फ्लैट-मकानों के मामले पर ग्रुप ऑफ मिनिस्ट्रर्स (जीओएम) के गठन को मंजूरी मिल गई है. जीओएम अब इस पर फैसला लेगा. प्रधानमंत्री ने अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन फ्लैट-मकानों पर जीएसटी दर घटाने के संकेत दिए थे. अंडर कंस्‍ट्रक्‍शन फ्लैट और मकान 12 फीसदी के टैक्‍स स्‍लैब में आते हैं.

Wednesday, 16 January 2019

RBI k governor sashikant das

केन्द्र सरकार ने 11 दिसम्बर 2018 को शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का नया 25वां गवर्नर नियुक्त किया। उनका गवर्नर पद पर कार्यकाल 3 वर्ष का होगा। बता दें कि उर्जित पटेल ने 10 दिसम्बर को अचानक गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया था। आर्थिक मामलों के विभाग के पूर्व सचिव शक्तिकांत दास 1980 बैच के तमिलनाडु काडर के आईएएस अधिकारी हैं। वह वित्त आयोग के सदस्य रह चुके हैं। उनकी पहचान एक ऐसे नौकरशाह के तौर पर है जिन्होंने केन्द्र में तीन अलग अलग वित्त मंत्रियों के साथ सहजता के साथ काम किया। शक्तिकांत दास को कार्य-क्रियान्वयन में दक्ष और टीम का व्यक्ति माना जाना जाता है। सनद रहे कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) भारत का केन्द्रीय बैंक है। जिसकी स्थापना भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुसार 1 अप्रैल, 1935 को हुई थी। यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है। रिजर्व बैक भारत की अर्थव्यवस्था को नियन्त्रित करता है। भारतीय रिजर्व बैंक की संरचना में एक गर्वनर और चार डिप्टी गवर्नरों होते है। रिज़र्व बैंक का केन्द्रीय कार्यालय प्रारम्भ में कलकत्ता में स्थापित किया गया था जिसे 1937 में स्थायी रूप से बम्बई में स्थानान्तरित कर दिया गया। केन्द्रीय कार्यालय वह कार्यालय है जहाँ गवर्नर बैठते हैं और नीतियाँ निर्धारित की जाती हैं। वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikant Das) के अलावा चार डिप्टी गवर्नर एम.के. जैन, बी पी कानूनगो, विराल वी आचार्य और एन.एस. विश्वनाथन भी है। शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) : एक परिचय ● शक्तिकांत दास 1980 बैच के तमिलनाडु काडर के आईएएस अधिकारी हैं। दास दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नात्कोत्तर हैं। वे अपने 37 वर्ष के लंबे कार्यकाल में केंद्र और राज्य में ज्यादातर आर्थिक एवं वित्त विभागों में ही तैनात रहे। ● उन्हें वित्त मंत्रालय में पहली बार वर्ष 2008 में संयुक्त सचिव के तौर नियुक्त किया गया, जब पी. चिदंबरम वित्त मंत्री थे। इसके बाद संप्रग सरकार में जब प्रणब मुखर्जी ने वित्त मंत्री का कार्यभार संभाला तब भी वह इसी मंत्रालय में रहे और पहले संयुक्त सचिव के तौर पर और फिर अतिरिक्त सचिव के रूप में लगातार पांच साल वह बजट बनाने की टीम का हिस्सा रहे। यह कार्यकाल चिदंबरम और मुखर्जी दोनों के समय रहा। यह भी जानें : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर की सूची (1935-2019) ● शक्तिकांत दास को दिसंबर 2013 में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में सचिव बनाया गया लेकिन मई 2014 में केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद उन्हें वापस वित्त मंत्रालय में राजस्व सचिव बनाया गया। ● उन्होंने माल एवं सेवाकर को लागू करने में आम सहमति बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। ● सितंबर 2015 में शक्तिकांत दास आर्थिक मामले विभाग में स्थानांतरित किये गये, जहां उन्होंने नोटबंदी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नोटबंदी के बड़े झटके के दौरान सरकार का बचाव करते हुये उन्होंने न केवल आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई बल्कि अर्थव्यवस्था में 500 और 2,000 रुपये का नया नोट जारी करने और इसकी आपूर्ति बढ़ाने में भी अग्रणी भूमिका निभाई।

Wednesday, 9 January 2019

IMF ...(gita gopinath )

*_गीता गोपीनाथ ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की मुख्य अर्थशास्त्री का पदभार संभाला_* _प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) में मुख्य अर्थशास्त्री का पद संभाल लिया है. इस पद पर पहुंचने वाली वह पहली महिला हैं. वे आइएमएफ की 11वीं मुख्य अर्थशास्त्री हैं._ _वे ऐसे समय में इस पद पर नियुक्त की गई हैं, जब दुनिया वित्तीय अनिश्चितता से गुजर रही है. उन्होंने मौरिस ओस्फेल्ड की जगह ली है, जो पिछले वर्ष 31 दिसंबर को रिटायर हो गए. वे मुद्राकोष की आर्थिक सलाहार और इसके अनुसंधान विभाग की निदेशक बनायी गयी हैं._   *_दूसरी भारतीय: _आईएमएफ़ में इस पद पर पहुंचने वाली गीता दूसरी भारतीय हैं. उनसे पहले भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी आईएमएफ़ में प्रमुख अर्थशास्त्री रह चुके हैं._ *_आईएमएफ के लिए नीतिया तैयार करना:* _आईएमएफ के लिए नीतियों को तैयार करने और रणनीतियों को निर्धारित करने और विभिन्न देशों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने में मदद करने के अलावा, वह विश्व आर्थिक आउटलुक रिपोर्ट का काम भी देखेंगी, जिसे वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख सर्वेक्षण माना जाता है._   *_गीता गोपीनाथ के बारे में* _•   गीता का जन्म वर्ष 1971 में भारत के मैसूर शहर में हुआ था._ _•   उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन से एमए की डिग्री हासिल की. उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री प्रिंसटन विश्विद्यालय से वर्ष 2001 में प्राप्त की._ _•   उन्होंने वर्ष 2001 से शिकागो विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर काम शुरू कर दिया. वे वर्ष 2005 से हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ा रही हैं. वे फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क के सलाहकार भी हैं._ _•   वे अमेरिकी आर्थिक समीक्षा की सह-संपादक, अंतर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र की वर्तमान हैंडबुक की सह-संपादक और आर्थिक अध्ययन की समीक्षा की संपादक भी रह चुकी हैं._ _•   उन्होंने भारत के वित्त मंत्रालय के लिए जी -20 मामलों पर प्रतिष्ठित व्यक्ति सलाहकार समूह के सदस्य के रूप में भी कार्य किया._ _•   वे वर्ष 2018 में अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज में फैलो चुनी गई थी. उन्हें वर्ष 2017 में वाशिंगटन विश्वविद्यालय से विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार मिला. उन्हें वर्ष 2011 में विश्व आर्थिक मंच द्वारा यंग ग्लोबल लीडर के रूप में चुना गया था._ _•   उन्हें वर्ष 2003 और वर्ष 2004 में जर्नल ऑफ इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स में प्रकाशित सर्वश्रेष्ठ पेपर के लिए भगवती पुरस्कार से सम्मानित किया गया था._ _•   गीता गोपीनाथ केरल के मुख्यमंत्री की आर्थिक सलाहकार भी हैं और हार्वर्ड में प्रकाशित उनके जीवन परिचय के मुताबिक, इस मानद पद पर उनकी नियुक्ति साल 2016 में हुई थी और उन्हें मुख्य सचिव का रैंक दिया गया है._ _•   गीता गोपीनाथ विनिमय दरों, व्यापार और निवेश, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट, मौद्रिक नीति और उभरते बाजारों के संकट पर 40 अनुसंधान लेख प्रकाशित कर चुकी हैं._ *_अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बारे में: _अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो अपने सदस्य देशों की वैश्विक आर्थिक स्थिति पर नज़र रखने का काम करती है. यह अपने सदस्य देशों को आर्थिक और तकनीकी सहायता प्रदान करती है. यह संगठन अंतरराष्ट्रीय विनिमय दरों को स्थिर रखने के साथ-साथ विकास को सुगम करने में सहायता करता है. इसका मुख्यालय वॉशिंगटन डी॰ सी॰, संयुक्त राज्य में है।_ ➖➖➖➖➖➖➖➖

यूएन की रिपोर्ट 2019-20 मे भारत के विकास का स्तर कैसा रहेगा

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की वैश्विक आर्थिक स्थिति एवं संभावनाएं (डब्ल्यूईएसपी) 2019 रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2019 और 2020 में दुनिया की सबसे ते...